हम जिंदगी में क्या बनना चाहते हैं और क्या बन जाते हैं इसकी सबसे बेहतरीन मिसाल हूँ मैं !!!
जब कोटपुतली कस्बे की सरकारी प्राइमरी स्कूल में पहली दूसरी कक्षा में पढ़ते थे तो एक चपरासी था लालचंद ..........पूरा दिन दारू पी कर नौकरी करता था ! उसका काम था घंटी बजाना । वो घंटी बजता था तो मन करता था की कितना मजा आता होगा ना ऊंचाई पर टंगी पीतल की घंटी बजाने में । तब मन में ये ही ख्वाहिश थी की बड़ा होकर चपरासी बनना जिससे हमेशा उस सुंदर सी घंटी को बजता रहूँ !
फिर थोड़े और बड़े हुए तो एक दिन बिजलीघर के लाइन मेन को खम्भे पैर चढ़ते देखा ! इतना रोमांचित हुआ कि मुझे लगा कि
ये सब से अच्छा काम है । फिर मन करता की भगवान् मेरी भी ऐसी नौकरी लगवा दे की सारे दिन खम्भों पर उतरता चढ़ता रहूँ !
कुछ और बड़े हुए तो फिर बाज़ार से गुजरते पल्लिदारों को देख कर लगता अरे यार कितना मज़बूत शरीर होता है इन का की १०० किलो की बोरी को एक सेकंड में पीठ पर लाड कर यहाँ से वहां पंहुचा देते है। हे भगवान् मुझे तो पल्लिदार ही बनाना !
पर हाय रे मेरे सपने..........सब एक एक कर बिखर गए !
फिर एक नया सपना देखना शुरू किया ! हाई वे से गुजरते फौजियों का कारवां देख कर ज़िन्दगी का सब से बड़ा ओर दुखान्तिक सपना शुरू हुआ ! ज़िन्दगी को एक दिशा मिल गयी थी ! अब ओर कुछ नहीं बनना था सिवाय फौजी बनने के !
ये बात १९९४ की है जब मैं आठवीं क्लास में पढता था ! फिर शुरू हो गयी ज़द्दोज़हद फौजी बनने के लिए ! रोजाना दौड़ लगाना , दंड बैठक लगाना ओर फौजी बनने के तरीके मालूम करना !
नवीं क्लास में सीनिअर स्कूल में एडमिसन लिया तो तरीका दिख गया ! एन सी सी ! ! ! ! पर जब तक तरीका दिखा तब तक एनरोलमेंट बंद हो गए थे ! शेखावत सर से खूब रिक्वेस्ट की तो सर ने भरोसा दिलाया की तुझे दसवीं में एन सी सी में ले लेंगे !
नवी अच्छे नम्बर्स से पास कर ली ओर दसवी में एन सी सी में एनरोल भी हो गए ! फिर शुरू हो गयी लेफ्ट राइट ओर परेड थम !
ज़िन्दगी में पहली बार घर से १० दिन के लिए दूर जाना पड़ा जब एन सी सी का वार्षिक कैम्प करने जयपुर के पास जामडोली गए ! तब फ़ौज की ज़िन्दगी से नजदीकी साक्षात्कार हुआ ! मुझे लगा की यार ये ही तो वो ज़िन्दगी है जिस के लिए मैं कुछ भी कर सकता हूँ ! चलो अच्छा हुआ की एन सी सी ज्वाइन कर ली जिस से पता चला की बनना है तो बस लेफ्टिनेंट ! क्या करारे सेल्यूट मिलेंगे ! क्या कड़क वर्दी रहेगी ओर क्या मस्त घुमक्कड़ ज़िन्दगी होगी ! तो भाई हम लग गए एन डी ए की तैय्यारी में !
Sunday, December 20, 2009
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